भावनायें जो नदियों की तरह बहा करती थीं , बर्फ़ सी जमी हैं सीनों में , इंसानियत की परिभाषा बदल सी गयी है, राजनीति और […]
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एक परिंदा उड़ने को था !
कल ही तो तिनका जोड़ा था ,चुन के एक सुरक्षित कोना , पेड़ की ऊंची डाली पर , बनाया एक घोंसला छोटा था। […]
Read more….पता ही नहीं चला !
जीवन ने एक अजीब सी करवट ले ली है, कुछ एक दशक की बात है बस , दिलों से किताबों और फिर कब, इंटरनेट के […]
Read moreउम्र: बढ़ती सी -थोड़ी खिलती सी।
उम्र की लम्बी होती लकीरों पर संतुलन बनाना सीख लिया है भावनाओं ने, परेशानियों की ज़मीन पर उगने लगा है, महकता सा फूल […]
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